Rajkamal Prakashan
Moortein: Mati Aur Sone Ki
Product Code:
9788126730711
ISBN13:
9788126730711
Condition:
New
$37.68
Moortein: Mati Aur Sone Ki
$37.68
नवलजी कहते रहे हैं कि संस्मरण एक थकी हुई विधा है, यद्यपि वे युवा-काल में भी स्फुट संस्मरण लिखते रहे हैं। उदाहरण के लिए नागार्जुन पर लिखे गए उनके संस्मरण 'लौट आ ओ फूल की पंखड़ी' को देखा जा सकता है। अब जाकर उन्होंने उसका उत्तरार्ध इस पुस्तक में लिखा है। इस पुस्तक की भूमिका में उन्होंने संस्मरण लिखने की कठिनाइयों की ओर संकेत भी किया है। यह वस्तुतः साहित्य की सबसे नाजुक विधा है, जिसकी रचना में यह खतरा बराबर बना रहता है कि कहीं ऐसा न हो कि 'लिखत सुधाकर गा लिखि राहू'। संस्मरण के चरित्रों की स्मृतियाँ भले क्रमबद्ध रूप में सामने न आएँ, पर उनमें संजीदगी के साथ एक खुलापन तो होना ही चाहिए। दूसरे, कमल पूर्णतः प्रस्फुटित हो, पर उसकी पँखुरियों पर जल का दाग न लगे। वस्तुतः संस्मरण लिखना 'तलवार की धार पर धावनो है'। पाठक देखेंगे कि नवलजी सत्य का अपलाप न करते हुए भी इसमें सफल हुए हैं। संस्मरणों की इस पुस्तक के दो खंड हैं। पहले खंड में घर और गाँव के पाँच चरित्र हैं। ये सारे चरित्र अपने वैशिष्ट्य से युक्त हैं, जिन्हें लेखक ने विलक्षण कुशलता से चित्रित किया है। उनके चित्रण में यथास्थान बज्जिका के शब्दों के प्रयोग से माटी की खुशबू उठती है और चतुर्दिक् फै
| Author: Nandkishore Naval |
| Publisher: Rajkamal Prakashan |
| Publication Date: Dec 01, 2017 |
| Number of Pages: 226 pages |
| Binding: Hardback or Cased Book |
| ISBN-10: 8126730714 |
| ISBN-13: 9788126730711 |